कलम का तिलक,नई दिल्ली-22 अगस्त। मुस्लिम समाज में 1400 वर्षो से चली आ रही तीन तलाक की
Three-divorces-of-Muslim-society-work-out कुपरंपरा का काम तमाम सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ के फैसले ने  कर दिया है आज के बाद कोई भी मुस्लिम किसी मुस्लिम महिला को तलाक-तलाक-तलाक कह कर घर से बाहर का रास्ता नही दिखा सकेगा इस पर सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तीन तलाक पर 6 माह के रोक लगा दी है अगर सरकार छह महीने में तीन तलाक़ खत्म करने के लिए ड्राफ्ट लाती है तो कानून बनने तक रोक जारी रहेगी।
 साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने गेंद सरकार के पाले में डालते हुए सरकार को 6 माह में इस पर कानून बनाने के लिए कह दिया है। ज्ञातव्य है कि जिन पांच जजों की बेंच ने यह फैसला सुनाया है, वे पांचों जज अलग-अलग धर्म से हैं जिनमें हिन्दु,सिख,मुस्लिम,ईसाई व पारसी धर्म में एक एक एक जज थे सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय बेंच में चीफ जस्टिस जेएस खेहर, जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस अब्दुल नज़ीर और जस्टिस रोहिंग्टन एफ नरीमन शामिल हैं।
एससी ने इस मामले में अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाता हुए कहा है कि सरकार 6 माह में संसद में तीन तलाक पर कानून बनाए।
ज्ञातव्य है कि तीन तलाक मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने 12 मई से 18 मई के बीच पांच दिन सुनवाई की थी। उल्लेखनीय है कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) भी तीन तलाक को भयावह, गुनाह और अवांछनीय करार दिया है और कुरान तथा शरिया में भी इसकी इजाजत नहीं दी गई है। दुनिया के कई मुस्लिम देशों में भी तीन तलाक गैर कानूनी है।